तेनाली रामकृष्ण रचित कहानियां और जीवन | Stories composed by Tenali Ramakrishna.


 
जन्म 22 सितंबर 1480
निधन - 5 अगस्त 1528 (आयु 47)
जन्म स्थान - तेनाली, विजयनगर साम्राज्य


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 तेनाली रामकृष्ण | Biography about  Tenali Ramakrishna in Hindi

 तेनाली रामन इस नाम से तो सभी परिचित होंगे क्योंकि जब हम बचपन में अपनी स्कूल की शिक्षा प्राप्त करते हैं तो इनके बारे में पढ़ा है तो चलिए हम जानते हैं कि तेनाली रमन कौन थे

तेनाली रामन एक प्रसिद्ध कवि थे।  तथा उन्हें लोकनायक भी कहा जाता था और उन्हें लोकनायक कि दर्जा तेनाली रामन को तब मिली जब वे कृष्णदेव राय के दरबारी कवि थे और तेनालीरामन  ने धर्म पर गंभीर रचनाएं भी की है तथा उन्हें विकट कभी भी कहा जाता है जिसका अर्थ जो कर विदूषक कवि है। 

तेनाली रामन को तेनाली रामा के नाम से भी जाना जाता है इनका जन्म एक छोटे से गांव में 16 वीं शताब्दी में हुआ था। इनके पिताजी का नाम गरलापतिरामा तथा उनके माता का नाम लक्ष्मा था।  इनके पिता जी राम लिंगेश्वर स्वामी मंदिर में एक पुजारी के रूप में पूजा करते थे और जब रामकृष्णन छोटे थेतभी इनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी।  उनके माता का नाम लक्ष्मा था। पिताजी की मृत्यु के बाद रामाकृष्णन उनकी माताजी ने तेनाली रामन को लेकर अपने भाई के यहां रहने लगी।  वे तेलुगु भाषा के महान विद्वान और कवि थे तेनाली रामाकृष्ण दरबारी  तथा मंत्री भी थे।  इनका जन्म एक तेलुगु भाषी नियोगी हिंदू ब्राह्मण परिवार में ठुम्मलुरू नामक गांव में हुआ था।  वह ज्ञान पाने के लिए बहुत ही भूखे तथा एक बचपन से ही जिज्ञाशु थे किसी भी चीज को सीखने की उनमे बहुत ललक थी। 


तेनाली रामकृष्ण की शिक्षा (Tenali Ramakrishna’s Education)

इन्होंने बचपन में कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी लेकिन ज्ञान की बुक होने के कारण में एक महान विद्वान बन गए एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार वैष्णव विद्वान ने उन्हें एक शिष्य के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह एक शैव थे। फिर भी रामकृष्ण ने हार नहीं मानी वे  ज्ञान पाने के लिए हटी थे इसलिए वे कई पौढो के पास गए और शिष्य के रूप में स्वीकार करने के लिए विनम्रता पूर्वक विनती की लेकिन किसी ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें बाहर निकाल दीया। इतना कुछ इनके साथ होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।उसी दिन के उन्होंने सोच लिया था  कि वह शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी से भीख नहीं मांगेंगे। 

तेनाली रामकृष्ण शिक्षा काल  (Tenali Ramakrishna’s Education)

अगले दिन रामकृष्णा शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाहर निकल गए। उन्होंने किसी शिक्षक से संपर्क नहीं किया और गांव के स्कूल के पास चले गए और स्कुल  बाहर दीवार के पास बाहर खड़े हो कर उस विद्यालाव के जो भी क्षिखा दी जाती वो देखते और सीखते थे हर दिन वह दीवार के पास खड़ा होते थे और कक्षा में पढ़ाए जाने वाले पाठकों को ध्यान से सुनते और घर वापस जाते और जो कुछ भी सीखते अपनी मां को सुनाते थे वह यही कार्य रोज करते थे और यह उनका रोज का दैनिक अभ्यास बना लि  था और इससे उन्हें अच्छी ज्ञान प्राप्ति होती थी लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रामकृष्णन पकड़े गए हैं और उन पर चोरी का आरोप लगा दिया गया इसलिए उन्होंने अपनी कहानी स्कूल के शिक्षकों को सुनाई रामकृष्ण की कहानी सुनने के बाद शिक्षक को गर्व महसूस हुआ लेकिन स्कूल प्रशासन के कड़े मानदंडों के कारण वह इसके बारे में कुछ नहीं कर सके इसलिए उन्हें दूर भेज दिया गया। 

 इसके बाद वह शिक्षा प्राप्त करने के लिए दर-दर भटक ही रहे थे तभी उनकी मुलाकात एक ऋषि से हुई जिन्होंने उन्हें देवी काली की पूजा करने के लिए सलाह दी उन्होंने अपनी भक्ति के साथ देवी काली की पूजा की और उनका आव्हान किया जिसके बाद आदर्श व्यक्तियों का कहना था कि मां काली उनकी पूजा से प्रसन्न हुई और उनके सामने प्रकट हुई और उनकी हास्य की भावना की प्रशंसा की और उन्हें आशीर्वाद दिया कि एक दिन उन्हें विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक महान कवि के रूप में प्रशंसीत किया जाएगा देवी मां काली ने उनकी बुद्धि और हादसे से प्रभावित होकर उन्हें विकास कवि की उपाधि दी जिसके बाद वह विजय नगर के राजा देव राय के दरबारी बने और महान कवि भी बने। और \जीवन परिचय 

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तेनाली रामकृष्ण प्रसिद्ध कहानियां (Stories Tenali Ramakrishna)

  • कितने कौवे
  • कृष्णदेवराय की उदारता
  • तेनालीराम की घोषणा
  • तेनालीराम की सूजबुझ
  • सीमा की चौकसी
  • तेनालीराम की कला
  • कुवे का विवाह
  • बोलने वाला भूत
  • उधार का बोझ
  • कौन बड़ा
  • जनता की अदालत
  • कंजूस सेठ
  • तेनाली रामकृष्ण पर लिखित पुस्तकें (Books on Tenali Ramakrishna)

  • रमन ऑफ तेनाली
  • द बीरबल ऑफ द साउथ 
  • द बेस्ट ऑफ तेनाली रमन 
  • तेनाली रामकृष्ण की मृत्यु (Tenali Ramakrishna’s Death)

    विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय की मृत्यु के 1 साल बाद 1528 में तेनालीराम की एक विशाल सर्पदंश के काटने से मृत्यु हो गई। 

    कहा जाता है कि रामकृष्णन कई बार राजा कृष्णदेव राय की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा गंभीर परिस्थितियों में भी उनके बचाव में उनके साथ रहे और उनके अच्छे मित्र भी थे।

     

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